रात यूं dil में
रात यूं dil में तेरी, खोयी हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाये,
जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम,
जैसे बीमार को बे-वजाह कुरार आ जाये.
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाये,
जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम,
जैसे बीमार को बे-वजाह कुरार आ जाये.
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