आस्मान की ओढ़ देख उसकी याद आती है
आस्मान की ओरदेख उसकी याद अति है
मगर कहते हैं!
याद तो उसकी आती है जिसे भुलाया जाता है....
तारों के हुजूम में एक तारा ख़ुशी से चमकता है
उसे देख कर शिद्दत से याद आती है...
मगर कहते हैं!
याद तो उसकी आती है जिसे भुलाया जाता है....
घर कि रोनक उसी से थी
अब आस्मान को देख कर अन्सौं कि लहर दौर जाती है...
मगर कहते हैं!
याद तो उसकी आती है जिसे भुलाया जाता है....
सूरज कि रौशनी से रोशन है ये जहाँ..
मगर उसकी रौशनी से रोशन है दूसरा जहाँ.....
ये सोच उसकी यद् तरसाती है
आस्मान कि ओर्ध
देख उसकी याद अति है
मगर कहते हैं!
याद तो उसकी अति है जिसे भुलाया जाता है......
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