सीतम...
एक मुद्दत हुई तुझे देखा नही मैंने,
मिलने पर मेरे अन्सुओ का हाल पूछना जरूर.
अब टोह खुली आंखो से हे सोने लगा ह मैं,
जब भी नींद आये मेरे ख्वाबो मी आना जरूर.
अब लगता है रोना हे भूल चूका हूँ मैं,
तुम बस एक बार मुझे रुलाना जरूर.
लोग कहते है अब मैं मर चूका हूँ,
तुम मुझे जिंदा होने का एहसास दिलाना जरूर.
ग़मों कि किताब लिखनी है और स्याही है मेरे आंसू,
पर तुम हर पल खुशियों मी मुस्कुराना जरूर.
बाद मौत के एक हलकी मुस्कुरात रहेगी चेहरे पर,
बस एक बार प्यार से मेरा सिर सहलाना जरूर.
तेरी राह देखते-२ आज खामोश हो गयी मेरी आँखे,
तू मेरी खुली आंखो से एक बार नज़रे मिलाना जरूर.
तुम्हारी हर एक मुस्कान हिफाज़त से संभाली है मैंने,
मेरी भी कुछ निशानियों पे तुम अपना हक जाताना जरूर.
जीते जी मिलना अब मुमकिन न होगा ए हुम्नाफाज़,
मजार पर मेरी तुम आना जरूर.
ए खुदा जिंदगी को टोह मैंने हे खूब सजा दे दी,
तू मेरी रूह पर जुल्म धना जरूर.
क्या करू तेरे सितम के लिए टोह ये जिंदगी कम पद गयी,
बस एक बार तू मुझे फिर से इंसान बनाना जरूर...
0 comments:
Post a Comment