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Friday, February 1, 2008

कोई धोखा जो

कोई धोखा ऐसा जो न खाया हमने
ज़िंदगी फिर भी तेरा साथ निभाया हमने
कभी म्हणत का सिला अपनी न पाया हुने
छाव औरून को मिली पेड़ लगाया हमने
जब कभी घाम की घटाओं ने मुघे घेर लिया
हर सुकून मान तेरी गोद मी पाया हमने
ये वाता वतन सिर्फ तेरी आब्रों रखने के लिय
खून अपनों का कई बार बहाया हमने
उम्र भर घाम की कड़ी धुप थी और
कही देखा न किसी पेड़ का साया हमने

ஜॐ♥ஜ______ஜॐ♥ஜ______ஜॐ♥ஜ______ஜॐ♥ஜ______ஜॐ♥ஜ

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