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Friday, February 1, 2008

तुमसे कहना तो चाते है

तुम्हे कहना तो चाते है
कह नही पाते है
तुम हो मेरे हमसफ़र
सफर कि वो मुलाक़ात
भुला नही पाते है
चांदनी रात मी हम
चाँद से आँख चुराते है
तुम्हे कहना तो चाते है बहुत
पर कह नही पाते है
डिल में है कितने गीत मेरे
किसी को सुना नही पाते है
दर्द है कितना गीत गीत में
उन गीतों को हम गुनगुना
नही पाते है
तुमसे कहना तो चाते है
पर कह नही पाते है

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