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Friday, April 11, 2008

तेरी दुनीया से नाता तोड़ चले हमे,,,,,,,,,,

तन्हाईयों से नाता जोड़ लीय हमने अपनों से नाता तोड़ लीय हमने,
छोड चले हमे उसकी mehfil को वीरानो से नाता जोड़ लीया हमने,
न रोना याद करके हमें ले तेरी दुनीया से नाता तोड़ चले हमे,,,,

लगता है अब दर्र इस प्यार से ,,,,,,,,,,,,,,

लगता है अब दर्र इस प्यार से
क्युंकी इसीने हमे ठुकराया है ,
इसी ने हमे तन्हायीओं से मीलाया है,
इसीने इन पलकों को हमारी भीगोया है,
इसीने हमको हमी से दूर कीया है,
इसीने हमे यादों की दुनीया ka मेहमान बनाया है ,,,
लगता है अब दर्र इस प्यार से,,,,,,,,,

होठो की ज़ुबा आंसू कहते है,
जो चुप है लेकिन फीर भी बहते है और
आंसू की कीस्मत तो देखीये, ये उनके लीये बहते है,
जो इन आँखों में रहते है

ये जिंदगी है या कोई छलावा,,,,

ITS ALSO MINE...........

ये जींदगी है या कोई छलावा,,,,

एक पल में खुशी देती है दूसरे ही पल आसुओं के सागर में डुबो देती है,

एक पल में साथ देती है दूसरे ही पल छीन लेती है सब कुछ,

एक पल में कीसीको अपना बनती है तो दूसरे ही पल में begana कर देती है,


एक पल में फूलों पर चलती है तो दूसरे ही पल में बैठा देती है काँटों पर,


एक पल में फलक पर पहुँचा देती है तो दूसरे ही पल में गीरा देती है ज़मीन पर,


एक पल में mehfil सजा देती है तो दूसरे ही पल में तन्हाईयों से कर देत है दोसती ,


एक पल साथ देती है सबका तो दूसरे ही पल में रूठ जाती है सबसे,
ये जिंदगी है या कोई छलावा,,,,,,,,,

एह फूल उठा लेता, रंगों में नहा लेता
तुम राज़ अगर होते, में दील में छुपा लेता...

यादों की दुनीया ka भी कया कहना,,,,,,,,,,,,,,,,

यादों की दुनीया ka भी कया कहना,
इसमें हर वो पल याद आता है जो,
इन पलकों पर आन्सुं दे जाता है,
पर कमबख्त ये दील फीर भी उसे याद करता है,
उस दरद को सहता है ,
तन्हाई में जीता है,
जानता है कभी नही वापस आने के,
फीर भी उन्ही ka इंतज़ार करता है,
फीर भी उन्हें याद करता है,
यादों की दुनीया ka भी कया कहना,,,

जो मर-मर के जीते हैं,
उनकी ख़बर नही लेनी चाहीये,
उनके लीये मौत
जीन्दगी baan कर आती है…
सीर्फ दुआ karanaa चाहीए
की उनको जल्द ही, मौत से
नई जीन्दगी मीले
उनकी तड़पती रूह को
हमेशा के लीये
सुकून-ऐ-राहत मीले…

चीता पर प्डी एक लाश थी
बस आग लगाने की देर थी
एक रूह थी ऊपर से देख रही,
यूं हे कीसी की राह ताक रही
इतने में एक शख्स आया,
सादे Vastra में कोमल काया,
रूह लाश से कह उठी
वह देख तेरा महबूब आया



mehfil में बातें करते जब हमे बीते दीनो को याद करते हैं,
सोचते हैं की वो सुनहरे दीन फीर वापस चली आयें,,
दोसती मुल्को की और मजहबों की सरहदे नही जानती,
वो तो दीलों की मिलन है जो जींदगी भर कहीं नहीं जाती.

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती, सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,


काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती, jindagii भर साथ नीभाने वाला रीश्ता है दोस्ती ,
rishton की नाजुकता समझाती है दोस्ती, rishton में वीश्वास दीलाती है दोस्ती,


तन्हाई में सहारा है दोस्ती, मझधार में कीनारा है दोस्ती,
jindagii भर जीवन में महकती है दोस्ती, कीसी-कीसी के नसीब में आती है दोस्ती,


हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती, हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "खुदा" है दोस्ती

खुशी भी दोस्तों से है
गम भी दोस्तों से है

तकरार भी दोस्तों से है
प्यार भी दोस्तों से है

रूठना भी दोस्तों से है
मानना भी दोस्तों से है

बात भी दोस्तों से है
मीसाल भी दोस्तों से है

नशा भी दोस्तों से है
शाम भी दोस्तों से है

जींदगी की shuruvaat भी दोस्तों से है
जींदगी मैं मुलाकात भी दोस्तों से है

मोहब्बत भी दोस्तों से है
इनायत भी दोस्तों से है

काम भी दोस्तों से है
नाम भी दोस्तों से है

ख्याल भी दोस्तों से है
अरमान भी दोस्तों से है

ख्वाब भी दोस्तों से है
माहोल भी दोस्तों से है

यादें भी दोस्तों से है
मुलाकातें भी दोस्तों से है

सपने भी दोस्तों से हैं
अपने भी दोस्तों से है

या यूँ कहूं यारो
अपनी तो दुनीया ही दोस्तों से है

दो अजनबी एक राह पर मीले..
राह ऐसी थी की कदम ruk से गए..
न हमें ख़बर थी न उनहे..
कब हम उन्के दीवाने हो गए..

जीसके पास कुछ नही उस पर दुनीया हंसती है,
जीसके पास सब कुछ है उससे दुनीया जलती है,
मेरे पास आप सब की दोसती है जीसे पाने को दुनीया तरसती है,,,

खुदा की इबादत में एक दुया हमारी होगी,
जीसमें मांगी हर खुशी तुमहारी hogi,
जब भी कोई दसतक सुनाई दे दील पर,
समझो वो दोसती की दसतक हमारी hogi,,,

दोसती
कुछ कहते हैं दोसती प्यार है,
कुछ कहते हैं दोसती zindagi है,
हम कहते हैं दोसती दोसती है,
जीस से बढकर न प्यार है न जींदगी है,,,

दोसती,,,,,

वीश्वास की एक दुरी है दोसती,
बेताब दील की मज़बूरी है दोसती,
न मनो तो कुछ भी नही,
और मनो तो खुदा की भी कमजोरी है दोसती,,,

tum ret ki manind

ey jindagi maine kitna sambhala tujhe
har hasrat har arzoo meri bus tere dum se hai
lekin maine jitna pakarna chaha tumhe kas key tum ret ki manind meri muthi se nikalti chaligayi,
phir yeh soch kar khamosh hoon ki jahan shabad gum ho jatey hain wahan chup baat karti hai,
jahan jikar tumhara hota hai,
bahan ehsaas hamara hota hai

खीलोना

दीलको खीलोना मानकर तोड़ गई वो,
हाथोको थामकर मेरे
आधे रासते में छोड़ गई वो,
हुई नाजाने कहाँ हमसे भूल?
खुसीयाँ देनेका दावा करने वाली
अब तनहाइयों के बीचमे छोड़ गई वो....

धड़कन

हर आहट पे तेरी तलाश है.. दूर होकर भी तू मेरे पास है.. न याद
आओ हमें इतना की हमारा दील हमसे पूछे.. की यार धड़कन कीस के पास है.

जगाया उन्होंने ऐसा की आज तक सो न सके,

जगाया उन्होंने ऐसा की आज तक सो न सके,
रुलाया उन्होंने ऐसा के सबके सामने रो भी न सके,
जाने कया बात थी उनमे,
जबसे माना उनहे अपना तबसे कीसी के हो न सके

wo samjhte hain.....

humien aansun se zakhmon ko dhona nahi aata,
milti hai khushi to use khona nahi aata,
sah lete hain har gum hans ke,
log kahte hain humein rona nahi aata,,,,,

Tuesday, April 8, 2008

Maum ki tarah pighalte dekha us ko
Rut jo badli, badalte dekha us ko
Woh jo kaanton ko bhi narmi se chua kerta tha
Hum ne phoolon ko masalte dekha us ko
Jaaney ki gham ko chupaaney ki tamanna hai usey
Aaj her baat pe hanstey dekha us ko
Jaaney woh maangna chahta hai duwaon mein kisey
Haath uthatey hi sisaktey huey dekha us ko.

I Miss You........

Duniya se kuch darta tha wo
Sehma sehma rehta tha wo

Janay kya baat thi us mein
Itna hasin kyon lagta tha wo

Ik bhool hui mujh se magar
Wafa he wafa karta tha wo

Kehte kehte ruk jata tha
Aksar aisa karta tha wo

Jo bhi kahna hai wo keh do
Mujh se yahi bus kehta tha wo

Sagar tere ghazal ye padh ker
Aksar roya karta tha wo

tasveer,,,,,

Mujse mat pooch ki kyun aankh jhuka li maine,
teri tasveer thi jo tujhse chupa li maine,
jis pe likha tha ki tu mere muqaddar mein nahi,
apne maathe ki woh tehreer mita li meine,


har janm sabko yahaan sachha pyaar kahaan milta hai,
teri chaahat mein to umr bita li meine,
mujhko jaane kahaan ehsaas mere le jaayein,
waqt ke haathon se ek nazm utha li meine,


ghere rehti hai mujhe ek anokhi khushbu,
teri yaadon se har ek saans saja li meine,
jiske sheron ko woh sunke bahut roya tha,
bas wohi ek ghazal sabse chupa li meine.

दुनीया

दुनीया में बहुत ग़म मीलेंगे,
सच मानो तो दोसत बहुत कम मीलेगा,
जीस मोड़ पर सब छोड़ दे साथ तुम्हारे
दोसत उसी मोड़ पर खडे हमे मीलेंगे