मैं नही मेरे लिए....
मैं नही खुद के लिए,हूँ मैं तेरे लिए,
खुद को ज़ख्म देकर आपको हस्सने के लिए...
हमने क्या क्या न किया तेरे चले जाने के बाद,
तुझे ही याद किया तुझ को भुलाने के लिए...
यह खिज़ा,यह अँधेरे,यह वीराना सा सफर,
हम तो निकले थे कहीं और ही जाने के लिए...
आइना देख के हैरान सा हो जाता हूँ,
खुद को ही भूल गया आप को पाने के लिए...
यूँ रकीबों से हस हस के क्यों मिलते हो सनम,
तेरी बेरुखी ही बहुत थी dil को जलाने के लिए...
यह जो चलाकता है आंखों से..इससे पानी न कहो,
यह तो मोती हैं मेरे प्यार को सजाने के लिए...
खुद को ज़ख्म देकर आपको हस्सने के लिए...
हमने क्या क्या न किया तेरे चले जाने के बाद,
तुझे ही याद किया तुझ को भुलाने के लिए...
यह खिज़ा,यह अँधेरे,यह वीराना सा सफर,
हम तो निकले थे कहीं और ही जाने के लिए...
आइना देख के हैरान सा हो जाता हूँ,
खुद को ही भूल गया आप को पाने के लिए...
यूँ रकीबों से हस हस के क्यों मिलते हो सनम,
तेरी बेरुखी ही बहुत थी dil को जलाने के लिए...
यह जो चलाकता है आंखों से..इससे पानी न कहो,
यह तो मोती हैं मेरे प्यार को सजाने के लिए...
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