यादों की दुनीया ka भी कया कहना,,,,,,,,,,,,,,,,
यादों की दुनीया ka भी कया कहना,
इसमें हर वो पल याद आता है जो,
इन पलकों पर आन्सुं दे जाता है,
पर कमबख्त ये दील फीर भी उसे याद करता है,
उस दरद को सहता है ,
तन्हाई में जीता है,
जानता है कभी नही वापस आने के,
फीर भी उन्ही ka इंतज़ार करता है,
फीर भी उन्हें याद करता है,
यादों की दुनीया ka भी कया कहना,,,
इसमें हर वो पल याद आता है जो,
इन पलकों पर आन्सुं दे जाता है,
पर कमबख्त ये दील फीर भी उसे याद करता है,
उस दरद को सहता है ,
तन्हाई में जीता है,
जानता है कभी नही वापस आने के,
फीर भी उन्ही ka इंतज़ार करता है,
फीर भी उन्हें याद करता है,
यादों की दुनीया ka भी कया कहना,,,
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