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Friday, April 11, 2008

होठो की ज़ुबा आंसू कहते है,
जो चुप है लेकिन फीर भी बहते है और
आंसू की कीस्मत तो देखीये, ये उनके लीये बहते है,
जो इन आँखों में रहते है

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